शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राज्य पुरस्कार योजना’ शुरू करने की मंजूरी प्रदान की है. मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर यह योजना उन शिक्षकों को सम्मानित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है जो तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण, अनुसंधान और उद्योग सहयोग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. एक सरकारी प्रवक्ता ने ये जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर छह श्रेणियों में कुल 10 शिक्षकों को यह पुरस्कार प्रदान करेगी. इन पुरस्कारों में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के तीन सर्वश्रेष्ठ शिक्षक, डिग्री स्तर पर दो ‘रिसर्च एक्सीलेंस एंड इनोवेशन अवार्ड’, पॉलिटेक्निक और आईटीआई स्तर पर दो ‘इंडस्ट्री कोलैबोरेशन अवार्ड’, तथा इंजीनियरिंग, फार्मेसी और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के एक-एक सर्वश्रेष्ठ शिक्षक को यह सम्मान मिलेगा.
प्रवक्ता ने कहा कि राज्यपाल द्वारा प्रदान किए जाने वाले इन पुरस्कारों में सम्मानस्वरूप एक मेडल, हिमाचली टोपी, स्कार्फ, शॉल, पुस्तकें, स्मृति चिन्ह तथा प्रशस्ति पत्र शामिल होगा. योजना का उद्देश्य न केवल शिक्षकों की सेवाओं को मान्यता देना है, बल्कि तकनीकी शिक्षा में नवाचार और उत्कृष्टता को बढ़ावा देना भी है.
उन्होंने बताया कि इस पहल से युवाओं के भविष्य को संवारने में लगे शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और वे और अधिक उत्साह के साथ कार्य करेंगे. पुरस्कार के लिए ऐसे शिक्षकों का चयन किया जाएगा, जिन्होंने शिक्षा, संस्थान विकास, मेंटरशिप, सामाजिक सेवा, अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई हो.
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के चयन के लिए एक बहुस्तरीय प्रक्रिया अपनाई जाएगी. पहले चरण में तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा नामित विशेषज्ञ समिति संस्थानों से प्राप्त नामांकनों की समीक्षा करेगी. इसके बाद तकनीकी शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति उपयुक्त उम्मीदवारों की अनुशंसा करेगी. अंतिम निर्णय सचिव (तकनीकी शिक्षा) की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय चयन समिति द्वारा लिया जाएगा.
प्रवक्ता ने कहा कि पुरस्कार किसी भी शिक्षक को उनके संपूर्ण सेवाकाल में केवल एक बार ही दिया जाएगा. सेवानिवृत्त शिक्षक या वे शिक्षक जिन पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित है, वे इस पुरस्कार के लिए पात्र नहीं होंगे. केवल वही शिक्षक पात्र माने जाएंगे, जो पुरस्कार वर्ष की 30 अप्रैल तक कार्यरत हों.
उन्होंने कहा कि पात्रता के लिए यह आवश्यक होगा कि शिक्षक ने शैक्षणिक नवाचार, उद्योग सहयोग, पेटेंट फाइलिंग या छात्र प्लेसमेंट में से कम से कम एक क्षेत्र में विशेष योगदान दिया हो. मूल्यांकन के दौरान शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध प्रकाशन, विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स, मार्गदर्शन, पाठ्यक्रम विकास, उपकरण निर्माण आदि को भी ध्यान में रखा जाएगा.
प्रवक्ता के मुताबिक फिलहाल प्रदेश में सरकार द्वारा पांच इंजीनियरिंग कॉलेज, पांच फार्मेसी कॉलेज, 17 पॉलीटेक्निक संस्थान और 153 आईटीआई संचालित किए जा रहे हैं. इसके अतिरिक्त राज्य में 180 निजी तकनीकी संस्थान भी कार्यरत हैं. इन सभी में कार्यरत शिक्षक इस पुरस्कार के लिए पात्र होंगे बशर्ते वे निर्धारित शर्तें पूरी करते हों.
हिन्दुस्थान समाचार