प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमइसवाई) के तहत भारत सरकार मत्स्यपालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही है. राज्यसभा में सांसद डॉ. सिकंदर कुमार के एक सवाल के जवाब में केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने यह जानकारी दी.
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत “मात्स्यिकी स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज 1.0” का आयोजन 13 जनवरी 2022 को किया गया था. इसमें 12 स्टार्टअप्स को चयनित कर प्रत्येक को 2 लाख रुपये नकद अनुदान दिया गया.इसके अलावा इन स्टार्टअप्स को उनके इनोवेटिव विचारों को प्रायोगिक रूप से लागू करने और उन्हें व्यावसायिक मॉडल में बदलने के लिए सामान्य वर्ग को 20 लाख और अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिलाओं को 30 लाख रुपये की सीड फंडिंग व इन्क्यूबेशन सपोर्ट प्रदान किया गया.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने के लिए स्थायी मत्स्य पालन पद्धतियों, बायोफ्लॉक व री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, पेन व केज कल्चर, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, वैल्यू एडिशन, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स, फिशिंग हार्बर, ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल टूल्स जैसे क्षेत्रों में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन उद्यमियों को वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन प्रदान कर रही है.
उन्होंने आगे बताया कि किसानों और मछुआरों की सुविधा के लिए ‘नेशनल फिशरीज़ डिजिटल प्लेटफॉर्म’ नामक मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से वे निष्पादन आधारित प्रोत्साहन, जलीय कृषि बीमा, संस्थागत ऋण की सुविधा, वित्तीय प्रोत्साहन के लिए आवेदन और फिश ट्रेसबिलिटी सिस्टम जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं. इस ऐप पर अब तक 21,56,099 मछुआरे, मत्स्य किसान और अन्य हितधारक पंजीकृत हो चुके हैं.
केन्द्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार महिला उद्यमियों को मत्स्य पालन स्टार्टअप इकोसिस्टम का सक्रिय और समान भागीदार बनाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है, ताकि हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में महिलाओं को समान अवसर प्राप्त हो एक समावेशी व लैंगिक दृष्टि से संवेदनशील फिशरीज़ इकोसिस्टम का निर्माण हो सके.
इससे पहले डॉ. सिकंदर कुमार ने राज्यसभा में सरकार से पूछा था कि क्या प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन स्टार्टअप्स को स्वीकृति दी गई है, तकनीकी उन्नति के लिए कितना फंड स्वीकृत हुआ है, क्या कोई मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च की गई है, और क्या हिमाचल प्रदेश में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कोई पहल की गई है?
हिन्दुस्थान समाचार