CAG Report: दिल्ली में नई सरकार के गठन के बाद अब पिछली AAP सरकार के कामकाज को लेकर कैग रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा रहा है. नई शराब नीति से सरकारी खजाने को 2 हजार करोड़ का नकुसान हुआ. इसके बाद अब कैग रिपोर्ट में मोहल्ला क्लीनिकों की सच्चाई भी उजागर हुई है. कैग रिपोर्ट के जारी होते ही मोहल्ला क्लीनिक को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं. कैग रिपोर्ट के अनुसार, क्लीनिक में सामान्य तौर पर पाए जाना वाला थर्मामीटर तक नहीं है. साथ ही डॉक्टरों की कमी, बुनियादी ढांचों की कमी आदि परेशानी से दिल्ली के मोहल्ले क्लीनिक जूझ रहे हैं.
कैग की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दिल्ली में कुल 218 मोहल्ला क्लीनिक है, जिनमें से 41 क्लीनिक डॉक्टरों की कमी की वजह से बंद पड़े हैं. क्लीनिक में आए मरीजों में 70 प्रतिशत को डॉक्टर एक मिनट भी नहीं देखते हैं. इसके अलावा 74 क्लीनिकस में दवाईयों का स्टॉक नहीं थे.
कैग रिपोर्ट में हुए बड़े खुलासे
कैग की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल 2017 में दिल्ली की सत्ता में आते ही केजरीवाल ने कुल 1000 मोहल्ला क्लीनिक खुलने का दावा किया था, लेकिन 2023 तक केवल 523 क्लीनिक खोले गए. साथ ही इन क्लीनिक्स में कई सुविधाओं की कमी है. इन क्लीनिक्स में तो दिव्यांग मरीजों के लिए व्हील चेयर तक नहीं, दवाईयों को स्टोर करने के लिए एसी की सुविधा नहीं और पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है.
जानिए क्या कहती है CAG रिपोर्ट?
- CAG रिपोर्ट के अनुसार कई मोहल्ला क्लीनिक्स में थर्मामीटर, ऑक्सीमीट- पल्स रेट की मशीनें भी उपलब्ध नहीं है.
- 2016-17 से लेकर 2020-21 तक अस्पतालों में 32000 नए बैड लगाने का प्रस्ताव था.
- 74 क्लीनिक्स में जरुरत दवाईयों के लिस्टड 165 दवाईयों का स्टॉक ही नहीं है.
- जनकपुरी में स्थित सुपर स्पेशियलिटी और राजीव गांधी अस्पतालों में लगभग 74 प्रतिशत डॉक्टर्स, 96 प्रतिशत नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिक्स के 62 प्रतिशत पद खाली है.
- दिल्ली के कई सारे मोहल्ला क्लीनिक्स में दिव्यांगों के रैम्पस की कमी, पीने के पानी की सुविधा नहीं है.
- साल 2016-17 के स्कूल स्वास्थ्य योजना के दौरान 17 लाख स्कूली बच्चों में से केवल 3 -साढ़े तीन लाख बच्चों को कवर किया गया.
- दिल्ली के 27 अस्पतालों में 50 प्रतिशत में आईसीयू, 8 अस्पतालों में ऑक्सीजन और 12 अस्पतालों में ऐंबुलेंस की कमी है. साथ ही 15 अस्पतालों में मुर्दाघर का अभाव है.