शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं से पानी का बिल वसूलने का अपना फैसला वापस ले लिया है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने शिमला में अधिकारियों के साथ बैठक कर इस बारे निर्देश जारी किए हैं. सरकार के इस कदम से ग्रामीण इलाकों के लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और अब उनसे जल शुल्क नहीं लिया जाएगा. हालांकि होम स्टे, होटल, अस्पताल और धर्मशालाओं जैसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं को पानी के लिए शुल्क देना होगा.
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के बिल को लेकर जनता से सुझाव मांगे गए थे. इसके बाद सरकार ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निशुल्क पानी की सुविधा जारी रखने का निर्णय लिया है. इस फैसले से लाखों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलेगी.
17 लाख ग्रामीण उपभोक्ताओं को राहत
प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 17 लाख पेयजल उपभोक्ता हैं. वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन योजना के तहत 9.50 लाख नए कनेक्शन जोड़े गए थे, जबकि इससे पहले 7.63 लाख कनेक्शन पहले से मौजूद थे. इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में लोगों को नल से जल आपूर्ति दी जा रही है.
पिछले वर्ष सितंबर में राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों में घरेलू उपभोक्ताओं से 100 रुपये मासिक बिल वसूलने का निर्णय लिया था. सरकार का तर्क था कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है. इसके बाद जल शक्ति विभाग ने 1 अक्टूबर 2024 से कई स्थानों पर पानी का बिल वसूलना शुरू कर दिया था. लेकिन अब सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए ग्रामीण उपभोक्ताओं को निशुल्क पानी देने का निर्णय लिया है.
इससे पहले जल शक्ति विभाग ने कई उपभोक्ताओं को तीन-तीन महीने के पानी के बिल जारी कर दिए थे और लोगों ने उन्हें जमा भी कर दिया था. अब सवाल यह उठ रहा है कि जो उपभोक्ता पानी का बिल पहले ही जमा करवा चुके हैं, क्या उन्हें उनकी राशि वापस मिलेगी?
इस पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए गए हैं. जानकारी अनुसार इस संबंध में अभी विचार किया जा रहा है और जल्द ही कोई ठोस निर्णय लिया जा सकता है.
मंत्रिमंडल की बैठक में हुआ था फैसला
राज्य मंत्रिमंडल की पिछली बैठक में पानी के बिलों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई थी. इसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने ग्रामीण इलाकों में घरेलू उपभोक्ताओं से पानी का शुल्क नहीं लेने के निर्देश जारी किए.
गौरतलब है कि पूर्व भाजपा सरकार ने ग्रामीण इलाकों में पानी निशुल्क देने का निर्णय लिया था. लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछले वर्ष इस फैसले को पलट दिया था और 100 रुपये प्रति माह जल शुल्क निर्धारित किया था. अब सरकार ने एक बार फिर अपना निर्णय बदलते हुए ग्रामीण इलाकों में मुफ्त पानी की सुविधा जारी रखने का फैसला किया है.
हिन्दुस्थान समाचार