Nanaji Deshmukh Death Anniversary: नानाजी देशमुख ने एक महान व्यक्तित्व के रुप में अपनी पहचान बनाई है जो की आने वाले समय में भी देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले लोगों के लिए हमेशा ही प्रेरणा का स्त्रोत रहेंगे. आज 27 फरवरी के दिन नानाजी ने दुनिया को अलविदा कहा था. उन्होंने स्वास्था, शिक्षा और ग्रामीण स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया. यहीं कारण है कि मरणोपरांत हमारे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया. उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें इस प्रकार से हैं-
1 नानाजी देशमुख का जन्म मराठी भाषी परिवार में 11 अक्टूबर को हुआ था. सामान्य परिवार में जन्में नानाजी खुद को शिक्षित करने के लिए उन्होंने सब्जी बेचने का भी काम किया था.
2 उन्होंने सीकर में अपने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की, जहां रावराजा ने नानाजी को स्कॉलरशिप स्कॉलरशिप भी दी थी.
3 नानाजी ने इसके बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी ज्वॉइन किया. उनकी कार्य का प्रमुख क्षेत्र उत्तर प्रदेश और राजस्थान का हिस्सा था. गोलवलकर ने उन्हें आरएसएस का प्रचारक बना दिया था.
4 देशमुख उन लोगों में थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित किया. वो अपनी पूरी जिंदगी आरएसएस के लिए काम करते रहे.
5 आगरा में नानाजी की पहली बार मुलाकात दीन दयाल उपाध्याय से हुई थी, जिसके बाद उनके जीवन में कई बड़े परिवर्तन आए.
6 नानाजी देशमुख भारतीय जनसंघ के भी नेता रह चुके हैं और साथ ही राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं. उन्होंने एक कद्दावर नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई.
7 अपने जीवन में नानाजी देशमुख ने समाज और देश की सेवा के लिए स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक से प्रेरणा ली. यही कारण है कि अब वो पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं.
8 27 फरवरी 2010 में 93 साल की उम्र में नानाजी देशमुख का निधन हो गया.
9 नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
10 भारत रत्न के अलावा नानाजी देशमुख को पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है